मां कूष्मांडा की पौराणिक कथा, पूजा विधि और मंत्र जानें

मां कूष्मांडा की पौराणिक कथा, पूजा विधि और मंत्र जानें

जैसा कि चैत्र नवरात्रि चल रही है, इन दिनों में हम मां दुर्गा के नौ अवतारों की पूजा करते हैं, और वो भी पूरे नौ दिनों तक. आज चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन है, ये शुभ दिन मां कुष्मांडा को समर्पित है जो शक्ति का अवतार हैं. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, उन्होंने इस संसार को अपनी दिव्य मुस्कान से जगमगाया. उन्हें ब्रह्माण्ड की देवी के रूप में भी जाना जाता है. जैसा कि उनके नाम से संकेत मिलता है, ये तीन अलग-अलग शब्दों का मिलन है, जिसका अर्थ है क्रिएटर ऑफ लिटिल कॉस्मिक एग.

मां कूष्मांडा का रूप

मां कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं, इसीलिए उन्हें अष्टभुजी के रूप में भी पूजा जाता है. वो त्रिशूल, चक्र, तलवार, गदा, धनुष-बाण जैसे घातक हथियार, अक्षमाला (माला), पवित्र अमृत का पात्र जो सुरा और रक्त धारण करती है. यो माना जाता है कि सिद्धि को सर्वश्रेष्ठ करने की शक्ति उनके जपमाला में स्थित है. देवी एक शेर पर सवार होती है जो अपने लोगों में निडरता का संचार करती है. वो कैलाश में निवास करती हैं और भगवान शिव उनके पति हैं.

मां कुष्मांडा को अर्पित करने वाली चीजें

माता कूष्मांडा सफेद कद्दू की बलि से प्रसन्न हो जाती हैं. इस दिन उन्हें हरे फल अर्पित करने से भक्तों को मानसिक शक्ति मिलेगी. सभी के बीच बांटे जाने वाले मालपुआ के भोग से देवी भी प्रसन्न होती हैं. सौंफ, इलायची और लाल फूल अर्पित करने से भी वो प्रसन्न होती हैं.

मां कूष्मांडा मंत्र

ओम देवी कूष्माण्डायै नमः सूरसम्पपूर्णा कलशम् रुधिराप्लुतनेव च

दधाना हस्तपद्माभ्याम् कूष्मांडा शुभदास्तु मे

मां कूष्मांडा स्तुति

या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

मां कूष्मांडा की कहानी

कहा जाता है कि पूरा ब्रह्मांड अंधकार से भरा था. देवी कुष्मांडा ने अपनी मूक मुस्कान के साथ थोड़ा लिटिल कॉस्मिक एग का प्रोडक्शन किया. उनकी दिव्य मुस्कान से अंधेरा मिट गया. उन्होंने प्रकाश और जीवन दिया और ब्रह्मांड को बनाया. पृथ्वी, सूर्य, तारे, ग्रह और सभी आकाशगंगाएं अस्तित्व में आईं. देवी कूष्मांडा प्रकाश और ऊर्जा का कारण हैं इसलिए वो सूर्य के मूल में रहती हैं. ब्रह्मांड का निर्माण करने के बाद, उन्होंने देवताओं को बनाया, जिसने बाद में पृथ्वी पर अन्य जीवित प्राणियों की रचना की.

मां कुष्मांडा की पूजा करने से निर्णय लेने और बुद्धि के स्तर को बढ़ाने की क्षमता में सुधार होता है। उसके भक्तों को बीमारियों, परेशानियों और जीवन की बाधाओं से लड़ने के लिए ताकत मिलती है. उन्हें समृद्धि, खुशी, शक्ति और मोक्ष मिलता है। वो अच्छी दृष्टि और मानसिक शक्ति के साथ धन्य हैं.

+